Thursday, 28 January 2010

वक़्त की किताब





















वक़्त की इस किताब पर लिखे हैं
मेरी ज़िन्दगी के कुछ हिसाब
हर पन्ना वो पुरानी याद का
मुझे मेरी एक नई पहचान दे जाता है
और फिर से लिख जाता है कुछ ऐसा
जो आज मेरा वर्तमान है कल मेरा इतिहास होगा
खोलो उन लम्हों से बंधे पन्नो को जिसमे
यादों की दस्तक कभी सुख तो कभी दुःख
बनकर तुम्हारा परिचय देती है.....

मैं और मेरा परिचय उन पन्नो की तरहां अस्थिर है
जिन्हें पढने के बाद पलट दिया जाता है....और फिर
नया पन्ना,नया परिचय और कुछ नई यादें
लेकिन वही वक़्त की पुरानी किताब...अक्षय-मन
Post a Comment