Saturday, 30 July 2016

अंतर्मन के भावों से

अंतर्मन के भावों से
ह्रदय-अमुक परिभाषित होगा
अग्न लगाते शब्दों का
अर्थ कोई अभिशापित होगा ।

जीवन-मृत्यु की पहेलियाँ
सुख-दुःख के भ्रम को सुलझाती है
काटों में जैसे अधखिली कलियाँ
खिल-खिलकर मुरझाती हैं ।

ह्रदय मेरा निस्पंद हुआ है
अटकी सांसें प्राणों में
क्या हैं वो सब सत्य गाथायें ?
जो लिखी गीता-पुराणों में ।

नीर तेरे गंगा-जमुना
जिसकी हर बूंद पावन है
प्यासा मन आज भीगा है
नयनो से बरसा सावन है ।

समय की रेत मुठ्ठी से निकले
जीवन तुम बढ़ जाने दो
दुःख के पल-चिह्न जो ठहरे है
अश्रुओं संग बह जाने दो ।
अक्षय-मन 

Saturday, 22 June 2013

तवायफ

पाँव में बेड़ियाँ जब छनकती  हैं
तो बेकल हो नाच 
उठते हैं मेरे सभी गम
मजबूरियों की ताल पर
हालातों के राग पर
मैं नाचती जाती हूँ
मैं नाचती जाती हूँ
मैं बाहर से कुछ और
अन्दर से कुछ और
दिखाई जाती हूँ
तमाशबीन इस दुनिया में
मैं ऐसे ही पेश की जाती हूँ
जहाँ मेरे दर्द-ओ -जिस्म
के हर रात  सौदे होते हैं
एक दुल्हन की तरहां मैं
हर रात सजाई जाती हूँ
मैं एक माँ,एक बहिन,
एक बेटी,एक बीवी और 
एक औरत बाद में
तवायफ पहले
कहलाई जाती हूँ 
 मैं औरत बाद में
तवायफ पहले
कहलाई जाती हूँ !!!!!!

~~अक्षय-मन 
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Saturday, 7 July 2012

मैं बदलते युग का उत्थान हूं




खुद पर ही करता  मैं अभिमान हूं 
मैं बदलते युग का हाँ उत्थान  . हूं 

सपन्न सभी जो बह चुके हैं नयन-नीर से 
अपने ह्रदय पर वार किये अपने ही तीर से 

पत्थरों में हाँ तराशा हूं खुद को 
बन रहा पत्थर या मैं भगवान् हूं 
खुद पर ही करता  मैं अभिमान हूं 
मैं बदलते युग का हाँ उत्थान  . हूं 

शोलों सी  जल रही हैं  आज सब दिशायें 
दिख रही हैं आज मुझको जिन्दा चितायें 

आएगी हाँ मौत बनकर आंधियां 
खड़ा रहा डटकर हाँ मैं चट्टान हूं 
खुद पर ही करता  मैं अभिमान हूं 
मैं बदलते युग का हाँ उत्थान  . हूं 

भूल चूका हूं सुर वो राग  वो गीत . सभी 
छोड़ चूका हूं प्यार वो साथ वो मीत सभी 

ये जीवन ही  बन जाये जब हाँ रणभूमि 
अंत से अपने लड़ रहा मैं लहू-लुहान हूं 
खुद पर ही करता  मैं अभिमान हूं 
मैं बदलते युग का हाँ उत्थान  . हूं 

देखो फेला हूं मैं सब संसार में
कहने को पर नहीं पर उड़ान हूं 

बादलों से गिर रही हैं जो बिजलियाँ 
छिप के रहना मुझसे में आसमान हूं 
खुद पर ही करता  मैं अभिमान हूं 
मैं बदलते युग का हाँ उत्थान  . हूं 

~~अक्षय-मन 
 © copyright