Saturday, 21 March 2009

कुछ मुक्तक

१.
उम्मीद की डोर बंधी है मेरे लहराते आँचल से
कोई झोका हवा का उसका पता पूछे गरजते बादल से
किसी को मालूम नही वो कहाँ है कैसा है कितना
दर्द है कितना इंतज़ार पूछो मेरे अश्क, मेरे काजल से ।
२.
सांसों को अपनी शब्दों का नाम देदो
क़यामत को इस कलम की पयाम देदो
तेरा क्या बिगाड़ पायेगा कोई
मौत को तुम अब मोहब्बत का काम देदो ।
३.
हर दरख्त,वो दुखती रग इक दुआ बन जायेगी
खुदा की रहनुमाई में छाव बन छा जायेगी
क्या बिगाड़ेगा कुछ नसीब अपना
शाख-शाख जब होंसलों की अस्ल बन जायेगी ।
४.

कोई चहरा इन निगाहों से बच नही सकता
सच झूठ का फ़ैसला एक रात में हो नही सकता
मैं जानकर भी अनजान हूं तेरे चहेरे की लकीरों से
छुपा  गया जो तू मुझसे राज वो गहरा हो नहीं सकता 



५.
जाओगे तुम जहाँ हमारा पथ वही है
सारथी हैं हम-तुम ये रथ भी वही है
चिरागों के बुझने से राहें नही खोती
विश्वास की राह जो चले सच्चा पथिक वही है ।
अक्षय-मन

39 comments:

दिगम्बर नासवा said...

सांसों को अपनी शब्दों का नाम देदो
क़यामत को इस कलम की पयाम देदो
तेरा क्या बिगाड़ पायेगा कोई
मौत को तुम अब मोहब्बत का काम देदो
अक्षय जी
सब की सब मुक्तक, सारे छंद एक से बढ़ कर एक. बहूत ही सुन्दर हैं...उअथार्थ की लेखनी से लिखे, सत्य की करीब और ये सब से बढ़ कर

BrijmohanShrivastava said...

मुक्तक पढने का आदेश हुआ /बहुत ही जानदार मुक्तक /दर्द से याद आया "वो मुझसे पूछते है दर्द कहाँ होता है ,अरे -एक जगह हो तो बतादूँ कि यहाँ होता है /मौत को तुम अब मोहब्बत का काम देदो या ""नाम देदो ""भी चलेगासही है नसीब क्या बिगाडेगा ""नशेमन पे नशेमन इस कदर तामीर करता जा ,कि बिजली गिरते गिरते आप खुद बेजार हो जाए ""विश्वास की राह और साथ में सन्मार्ग पर चले वही सच्चा पथिक है ऐसों के भटकने का डर नहीं होता

vandana said...

bahut din baad tumhara likha padha achcha laga
har muktak bahut hi gahrayi ke sath likha hua........har dard ko bayan karta hua.

योगेन्द्र मौदगिल said...

Prayaas jaari rakhe....

EHSAAS said...

sundar rachna akshay!

raj said...

koee chehraa en nigaho se bach nahi sakta...sunder ahsaas...

Amit K Sagar said...

यकीनन हमेशा की तरह बहुत अच्छा.

Poonam Agrawal said...

Laajavaab.....My best wishes

गर्दूं-गाफिल said...

दर्द है कितना इंतज़ार पूछो मेरे अश्क, मेरे काजल से

khyal achchhe hein
mnmamni se deewanee me aajao

अशोक लव said...

"उम्मीद की डोर बंधी है मेरे लहराते आँचल से"-sundar racna ke liye badhai!
-apke comments mere blog par mile.achchha laga.dnanyaad!

Priya said...

wah akshay! aapka jawab nahi

Babli said...

पहले तो मैं आपका तहे दिल से शुक्रियादा करना चाहती हूँ की आपको मेरी शायरी पसंद आई! मेरे दूसरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है!
मुझे आपका ब्लॉग बहुत अच्छा लगा!बहुत ख़ूबसूरत रचना लिखा है आपने जो काबिले तारीफ है!

Shama said...

Akshay, tumharee har rachna mujhe stabdh-nishabd kar detee hai..har baar dilse ek tamanna nikalti hai,ki, kaash kabhi maibhi itna sundar likh paatee...
Mere blogpe tumhen dekhe zamane ho gaye!

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Anonymous said...

bahot khoob likha hai akshayjee....

निर्झर'नीर said...

जाओगे तुम जहाँ हमारा पथ वही है

सारथी हैं हम-तुम ये रथ भी वही है

चिरागों के बुझने से राहें नही खोती

विश्वास की राह जो चले सच्चा पथिक वही है

aapka ye muktak bahut gahra hai..
aapne dosti ke layak samjha or meri hosla_afzaaii ki ye mere liye khushi ki baat hai ..shukria dil se

M VERMA said...

bahut sunder rachana

Pyaasa Sajal said...

itna achha likhte hai aap...mere hisaab se is blog par aur regularly likhna chahiye aapko...sach me kamaal ki rachnaaye hai yahaan

JHAROKHA said...

Bahut sundar muktak hain apke akshay ji.khaskar ye to bahut badhiya laga

सांसों को अपनी शब्दों का नाम देदो
क़यामत को इस कलम की पयाम देदो
तेरा क्या बिगाड़ पायेगा कोई
मौत को तुम अब मोहब्बत का काम देदो ।
shubhakaamnayen.

Nirmla Kapila said...

अक्षय जी मुक्तक बहुत अच्छे लगे पर सरे पडःते -2 आंखें थक गयी भै हम बूढों का भी ध्यान रखा करो पीछे की बैक ग्राऊंम्ड कुछ हलकी कर दो तो कृपा होगी आभार्

Nirmla Kapila said...

अक्षय जी मुक्तक बहुत अच्छे लगे पर सरे पडःते -2 आंखें थक गयी भै हम बूढों का भी ध्यान रखा करो पीछे की बैक ग्राऊंम्ड कुछ हलकी कर दो तो कृपा होगी आभार्

ज्योति सिंह said...

bahut khoobsurat rachana .bahut hi achchhaa laga .har line behatrin dil ko chu gayi .

Dr. shyam gupta said...

बहुत शानदार मुक्तक, अक्षय .

मस्तानों का महक़मा said...

hi,
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GAURAV said...

vaah bhai bahut achha likhte hai aap shabdo me bayan karna bahut muskil hai....

"अर्श" said...

jaari rakhe halaaki ye link mere se chhupaa rakhaa tha... khair prayaas jaari rakhe,......



arsh

Anonymous said...

Aap kuch muktak - www.kritya.in ke liye bhejen to accha lagega,

shubham

Rati Saxena

jamos jhalla said...

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Suman said...

good

बिहार भक्ति said...

sundar

'अदा' said...

जाओगे तुम जहाँ हमारा पथ वही है

सारथी हैं हम-तुम ये रथ भी वही है

चिरागों के बुझने से राहें नही खोती

विश्वास की राह जो चले सच्चा पथिक वही है
bahut accha laga..
likhte raho..

neera said...

sunder hein sabhi muktak!

Anonymous said...

A fantastic work of art! Beautiful.

pooja joshi said...

to guuuuuuuuud he sab ki sab....

Rakesh said...

poojaji
acha laga aapke muktak padhker....vishwas ki rah jo chale sacha pathik wahi...wah

श्याम सखा 'श्याम' said...

दर्द है कितना इंतज़ार पूछो मेरे अश्क, मेरे काजल से ।
दीप सी जगमगाती जिन्दगी रहे
सुख-सरिता घर-मन्दिर में बहे
श्याम सखा श्याम

महेन्द्र मिश्र said...

बहुत खूब!

SHAKTI PRAJAPATI said...

achha prayas hai,aur accha bhi ho sakta hai,laye rahiye.

Shail said...

very good yaar.. keep it up..

अनुपमा त्रिपाठी... said...

कल हलचल पर आपके पोस्ट की चर्चा है |कृपया अवश्य पधारें.....!!