Tuesday, 2 August 2011

परिणीता



कुछ बंधन,कुछ समर्पण 
और 
जहाँ प्रेम.विश्वास 
ममता का मिलन 
होता है 
वहां एक परिणीता का 
जन्म होता है 

चूड़ियों की खन-खन
पायलों की छन-छन 
और जब सोलह श्रंगार कर  
कोई मुखड़ा दमकता है 
वहां एक परिणीता का 
जन्म होता है 


मासूम बचपन,वो लडकपन  
और जब 
अपना अंगना 
बिछड़ता है
वहां एक परिणीता का 
जन्म होता है 

ताकता दर्पण वो हल्दी,चन्दन 
और घूँघट में जब कोई 
शर्म से दुपकता है 
वहां एक परिणीता का 
जन्म होता है

कुछ परिवर्तन,कुछ टूटे स्वप्न 
और जहाँ हर कदम पर 
जीवन उसका एक 
कसौटी 
पर उतरता है 
वहां एक परिणीता का 
जन्म होता है

जहाँ हर रिश्ता एकरूप होकर सिमटता है 
वहां-वहां एक परिणीता का जन्म होता है 
अक्षय-मन 

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